जसगीत लिरिक्स — “तोर जोत जवारा दाई”
मुखड़ा :
तोर जोत जवारा दाई, तोर जोत जवारा
वो।।
होवत हे विसर्जन दाई, लागे जीव कल्पन
दाई।।
.....
अंतरा 1 :
सातो बहिनी बोहे जवारा, जावय गंगा
नहाये।
आगू आगू सेऊक चले, जस पचरा ल गाये।।
चढ़ :
आंखी-आंखी म झूले दाई =2
होवत हे विसर्जन दाई...।।
....
अंतरा 2 :
सरधा भगती के जोत जवारा, निकले हे
आरा पारा।
पड़ा बईगा मन ह बांधे, गांव शहर पारा
पारा।।
चढ़ :
सबके भाग हा जागे दाई =2
होवत हे विसर्जन दाई...।।
....
अंतरा 3 :
कोनो हा दाई नरियल लेवय, कोनो हा लेवय
बाना।
झन जा न झन जा न दाई, मोला झन
रोवाना।।
चढ़ :
आशीष ल देबे दाई =2
होवत हे विसर्जन दाई...।।
✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Hemant Nirmalkar Official
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