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हो काली मारे किलकारी रण म रिसागे भारी ना-पूरण साहू

हो काली मारे किलकारी रण म रिसागे भारी ना-पूरण साहू

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🌺 गीत – काली मारे किलकारी

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🎤 मुखड़ा (टेक)

हो काली मारे किलकारी, रण म रिसागे

भारी ना।

हो काली मारे किलकारी, रण म रिसागे

भारी ना॥

उड़ान:

हो धर-धर के दानव खाएं- 2

करत हे उजारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

🎶 अंतरा – 1

रक्त बीज एक दानव भारी, शिव ले असवर

पाए,

जतका लहू गिरे भुईयां मां, रकत बीज

उपजाए।

शुंभ के सेना ला जगदम्बा हा, रण ले मार भगाए,

ऊही बेरा शुभ निशुंभ हा, रकत बीज ला

पठहाए॥

उड़ान:

हो मईया संग लड़े बर आगे – 2

दानव दुराचारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

🎶 अंतरा – 2

कहे देवी जेन जीतही रण में, ओकर बनहू

रानी,

बरजे देवी रकत बीज ला, नई मानिस

अभिमानी।

अहो देवी दानव के मचे लड़ाई परसे पान

जस पानी,

खलबल मचगे रण भुईयां मां, ऊपजे काली

भवानी॥

उड़ान:

हो रही-रही के बघवा दहाड़े – 2

करत हे उजारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

🎶 अंतरा – 3

काजर कस रूप बिराजित कारी, खाड़ा

खप्पर धरे,

कट-कट कटकट दांत ल कटरे, रही-रही के

किलकारे।

खच-खच काटे दानव मन ल, बोहाए लहू

अपारे,

चारो मुड़ा म लाश गजागे, रण म खरहर पारे॥

उड़ान:

हो देवी दानव दुनो दल मा- 2

मचगे हा-हा कारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

🎶 अंतरा – 4

रकत बीज के लहू गिरे ले, अड़बर असुरन

जागे,

अइसे लागे ये भुईयां मां, रकत बीज हा

भारागे।

तब जगदम्बा काली संग म, सुघ्घर बांधना

बधागे,

मारत हव तै पीबे लहू ल, अइसे गा समझागे॥

उड़ान:

हो गिरे झन लहू भुईया मां-2

मरही असुरारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

🎶 अंतरा – 5

मारे देवी तलवार मूसर मां, धरचंडिका

चबाथे,

पिए लहू काली सोसन भर, कोलिहा कुकुर

हा अघाये।

रकत बीज के नाव बुतागे, देवन सब हर्षाये,

शिव भोला ला देख के काली,माता हा थिराये॥

उड़ान:

हो बैरी के काल ओ काली-2

भगत हित कारी,

रण मा रिसागे भारी ना॥

हो काली मारे किलकारी...

--

✍ लेखक: पूरण साहू

🎤 प्रस्तुतकर्ता: KK CASSETTE


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