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🌸 जसगीत – “कुनिया लहसी गे अरे हां” 🌸
मुखड़ा (टेक):
कुनिया लहसी गे अरे हां…
पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। ✨
ये पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। ✨
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अंतरा 1️⃣
जब पहली बनिज बर गये महादेव,
का भरनी भर लाये… (2)
अंतरा 2️⃣
जब पहली बनिज बर गये महादेव,
लाये चंदन खाऊंवा… (2)
टेक:
जब बनिया के बैला हावे बुढ़वा,
कुनिया लहसी गे अरे हां…
पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। 2
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अंतरा 3️⃣
जब दूसर बनिज बर गये महादेव,
का भरनी भर लाये… (2)
अंतरा 4️⃣
जब दूसर बनिज बर गये महादेव,
लाये दंड कमंडल… (2)
टेक:
जब बनिया के बैला हावे बुढ़वा,
कुनिया लहसी गे अरे हां…
पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। 2
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अंतरा 5️⃣
जब तीसर बनिज बर गये महादेव,
का भरनी भर लाये… (2)
अंतरा 6️⃣
जब तीसर बनिज बर गये महादेव,
लाये मृगा के छाला… (2)
टेक:
जब बनिया के बैला हावे बुढ़वा,
कुनिया लहसी गे अरे हां…
पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। 2
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अंतरा 7️⃣
जब चौथा बनिज बर गये महादेव,
का भरनी भर लाये… (2)
अंतरा 8️⃣
जब चौथा बनिज बर गये महादेव,
लाये अंग भभूते… (2)
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अंतिम टेक:
जब बनिया के बैला हावे बुढ़वा,
कुनिया लहसी गे अरे हां…
पर्वत में महादेव, कुनिया लहसी गे हां। 2
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Sumiran Bhakti Mala
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