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मां येहो निरंजन जोगी, नंद घर अलख
जगाये हो मां...
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मुखड़ा:
हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,
नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।
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अंतरा 1 :
हा अंग भभूत, बगल मृग छाला, शेष नाग
लपटाये हो मां।।2।।
माथे उनके तिलक चंद्रमा, जोगी जटा
बड़ाये...
हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,
नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।
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अंतरा 2 :
हां ले भिक्षा निकले नंदरानी, मोतियन थाल
भराये हो मां।।2।।
भिक्षा लेकर जावो बाबा, मोर गोपाल डराये...
हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,
नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।
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अंतरा 3 :
हां ना चाहिए तोर धन और दौलत, न चाहिए
तोर माया हो मां।।2।।
तोर गोपाल के दरशन कारण, मैं कैलाश से
आया...
हो निरंजन जोगी, हो निरंजन जोगी,
नंद घर अलख जगाये हो मां।।2।।
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✍ लेखक: unknown
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Amaraiya Studio
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