जसगीत-
तोर नाक के नथनी चमके....
मुखड़ा :
तोर नाक के नथनी चमके,
तोर माथ के टिकली चमके,
वो अंगार मोतिया॥
ये अंगार मोतिया वो अंगार मोतिया,
तोर नाक के नथनी चमके,
तोर माथ के टिकली चमके,
वो अंगार मोतिया।।
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अंतरा 1 :
गोड़ कर बिछिया भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके...
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अंतरा 2 :
गोड़ कर चुरवा भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके -
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अंतरा 3 :
कनिहा कर करधन भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके...
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अंतरा 4 :
हाथ कर बनुरिया भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके...
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अंतरा 5 :
बांह कर पहुंची भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके...
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अंतरा 6 :
गल कर सूतिया भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके...
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अंतरा 7 :
कान कर खिनवा भुवन पर छोड़े,
वहु ला पहिर नई तो आये हो मां॥
मैं जब जानतेव हूम के लगीन ला,
करी आतेव सोला सिंगार हो मां॥
तोर नाक के नथनी चमके,
तोर माथ के टिकली चमके,
वो अंगार मोतिया।।
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✍ लेखक: गीतकार -पेखनलाल साहू
🎤 प्रस्तुतकर्ता: Pekhanlal Sahu Dhamtari CG
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