जसगीत -ये आजा वो आजा
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मुखड़ा:
ये आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
ये अनधन देवैया दाई वो...2
ये आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
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अंतरा 1 :
ये अपने भुवन ले पंडा पुकारे दुर्गा दाई आजा
वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
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अंतरा 2 :
ये अपने भुवन ले कुम्हरा पुकारे दुर्गा दाई
आजा वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
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अंतरा 3 :
ये अपने भुवन ले लोहरा पुकारे दुर्गा दाई
आजा वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
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अंतरा 4 :
ये अपने भुवन ले अहिरा पुकारे दुर्गा दाई
आजा वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
--
अंतरा 5 :
ये अपने भुवन ले मलिया पुकारे दुर्गा दाई
आजा वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
--
अंतरा 6 :
ये अपने भुवन ले बैगा पुकारे दुर्गा दाई
आजा वो,
तोर दरश बर अंखियां तरसे आके दरश देखा
जा वो,
उड़ान:
ये अनधन देवैया दाई वो...2
आजा वो आजा मोरे दुर्गा दाई आजा वो,
आजा मयारु दाई आजा वो।
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✍ लेखक: ओंकार वर्मा
🎤 प्रस्तुतकर्ता: HV Jas Geet 1M
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